2027 यूपी चुनाव: दलित वोटों पर कांग्रेस की नजर, गौतम को सौंपी प्रभारी की जिम्मेदारी
लखनऊ। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस ने दलित वोट बैंक पर कब्जा करने की रणनीति तेज कर दी है। पार्टी ने ब्राह्मण नेता अविनाश पांडे को यूपी प्रभारी पद से हटाकर दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम (जाटव समुदाय) को यह जिम्मेदारी सौंप दी है। यह फैसला दलितों को आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।79fc59
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2024 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस-एसपी गठबंधन ने 43 सीटें जीतीं। कांग्रेस ने 17 सीटों पर लड़ते हुए 6 पर जीत दर्ज की। दलित मतदाताओं ने संविधान और बाबासाहेब अंबेडकर को खतरे की आशंका के चलते गठबंधन को समर्थन दिया।
भाजपा ने 25 जून को संगठन में फेरबदल कर गैर-यादव पिछड़ों, ऊपरी जातियों और दलितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। लेकिन ब्राह्मण अभी भी कुछ मुद्दों (जैसे यूजीसी नियम) पर नाराज हैं। बसपा ब्राह्मणों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है। एसपी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर भरोसा कर रही है।
जाटव मतदाता (करीब 10%) 2027 में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा आरएसएस के जरिए दलितों में काम कर रही है। मायावती अभी भी जाटवों की पहली पसंद बनी हुई हैं। गौतम, जो पहले बसपा और आप में सक्रिय रहे, मायावती से मिलने की कोशिश कर चुके हैं लेकिन सफल नहीं हुए।
कांग्रेस के अंदर नए लोगों को तरजीह दिए जाने से पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष है। गौतम ने मायावती के घर जाकर बिना सूचना के मुलाकात करने की कोशिश की थी, जो विफल रही। कांग्रेस का मानना है कि दलित 2027 में भी गठबंधन के कारण एसपी के साथ आएंगे।
पार्टी ने 158 संभावित जीत वाली सीटों की पहचान की है। सीट बंटवारे पर अभी सहमति नहीं बनी है। गौतम की भूमिका सीट शेयरिंग और दलित समर्थन बनाए रखने में अहम होगी। कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक बिखर चुका है और वह एक वोट बैंक के जरिए दूसरे को साधने की कोशिश कर रही है।