सरोगेसी पर सख्ती: ‘किराये की कोख’ की मनमानी पर लगेगी रोक, पूरा सिस्टम होगा ऑनलाइन
नई दिल्ली। देश में सरोगेसी के नाम पर बढ़ती अनियमितताओं और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सरोगेसी केंद्रों के पंजीकरण, नवीनीकरण और निगरानी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ‘किराये की कोख’ के नाम पर चल रही अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और जरूरतमंद दंपतियों तथा सरोगेट माताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
नए नियमों के तहत अब सभी आवेदन केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। पहले जहां आवेदन प्रक्रिया मैन्युअल थी, वहीं अब डिजिटल प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और रिकॉर्ड का बेहतर रखरखाव हो सकेगा। इसके अलावा, सरोगेसी केंद्रों की निगरानी भी ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के जरिए की जाएगी।
सरकार ने नवीनीकरण शुल्क और विलंब शुल्क को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए हैं। निर्धारित समय सीमा में आवेदन नहीं करने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। साथ ही, आवेदन के निपटारे के लिए भी समय-सीमा तय की गई है, ताकि प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी न हो।
सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में सरोगेसी से जुड़े फर्जीवाड़े सामने आए हैं। कुछ मामलों में महिलाओं का शोषण, अवैध रूप से बच्चों की बिक्री और विदेशी नागरिकों को शामिल करने जैसे गंभीर आरोप भी लगे थे।
भारत में केवल परोपकारी (अल्ट्रूइस्टिक) सरोगेसी की अनुमति है, जबकि व्यावसायिक सरोगेसी पहले से ही प्रतिबंधित है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई ऑनलाइन व्यवस्था और कड़े नियमों से सरोगेसी क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी और जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत सहायता मिल सकेगी।